सवर्णों का गुस्सा अनुसूचित जाति उत्पीड़न कानून को लेकर

भारत बंद का आयोजन करने वाले संगठनों में ब्रह्म समागम समाज, क्षत्रिय महासभा, जन कल्याण संगठन और करणी सेना समेत 35 संगठन शामिल हैं। इस मामले पर समाज में विभाजन है इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर भारतीय समाज की यह एक सच्चाई है कि अभी भी अजा-अजजा पर समाज की संपन्न और दबंग जातियों की ओर से अत्याचार होते हैं तो उसी के साथ यह भी यथार्थ है कि अजा और अजजा उत्पीड़न निरोधक अधिनियम का दुरुपयोग भी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए ही फैसला दिया था कि मुकदमा दायर होते ही किसी को गिरफ्तार न किया जाए और कम से कम सात दिन तक उस मामले की तहकीकात की जाए। घटना सही पाए जाने पर ही मामला दर्ज हो।

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